RoofTop Solar System: बिजली गुल होने पर सोलर काम करता है क्या, जानिये ऑनग्रिड, ऑफग्रिड और हाईब्रिड सोलर की खासियत

Published On: February 15, 2026
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RoofTop Solar System: बिजली गुल होने पर सोलर काम करता है क्या, जानिये ऑनग्रिड, ऑफग्रिड और हाईब्रिड सोलर की खासियत

RoofTop Solar System: बिजली कटने पर सोलर सिस्टम काम करेगा या नहीं, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किस प्रकार का सोलर सिस्टम लगवाया है। साधारण तौर पर, अधिकांश सोलर सिस्टम बिजली कटते ही सुरक्षा कारणों से बंद हो जाते हैं। 

यहाँ अलग-अलग सिस्टम के हिसाब से जानकारी दी गई है:

  • ऑन-ग्रिड (On-Grid) सोलर सिस्टम: यह सिस्टम बिजली ग्रिड से जुड़ा होता है और इसमें बैटरी नहीं होती। बिजली कटने पर यह काम नहीं करता। इसका मुख्य कारण ‘एंटी-आइसलैंडिंग’ सुरक्षा फीचर है, जो ग्रिड में बिजली की आपूर्ति रोक देता है ताकि मरम्मत कर रहे कर्मचारियों को करंट न लगे।
  • ऑफ-ग्रिड (Off-Grid) सोलर सिस्टम: इस सिस्टम में बैटरी बैकअप होता है। बिजली कटने पर भी यह काम करता रहता है क्योंकि यह ग्रिड पर निर्भर नहीं होता और बिजली को बैटरी में स्टोर करके रखता है।
  • हाइब्रिड (Hybrid) सोलर सिस्टम: यह ग्रिड से भी जुड़ा होता है और इसमें बैटरी बैकअप भी होता है। बिजली कटने की स्थिति में, यह बैटरी का उपयोग करके आपके उपकरणों को चालू रखता है। 
सिस्टम का प्रकार बैटरीबिजली कटने पर काम करेगा?मुख्य उपयोग
ऑन-ग्रिडनहींनहींबिजली बिल कम करने के लिए
ऑफ-ग्रिडहाँहाँबिजली कटौती वाले इलाकों के लिए
हाइब्रिडहाँहाँबिल कम करने और बैकअप दोनों के लिए

विशेष टिप: यदि आपके पास पहले से ऑन-ग्रिड सिस्टम है और आप बिजली कटौती के दौरान बैकअप चाहते हैं, तो आपको उसे हाइब्रिड सिस्टम में बदलना होगा या एक उपयुक्त इन्वर्टर और बैटरी सेटअप जोड़ना होगा। 

घरों के लिए सोलर सिस्टम मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं, जिन्हें उनकी कार्यप्रणाली और ग्रिड से जुड़ाव के आधार पर वर्गीकृत किया गया है: 

1. ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम (On-Grid Solar System) 

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यह घरेलू उपयोग के लिए सबसे लोकप्रिय सिस्टम है। यह सीधे सरकारी बिजली ग्रिड से जुड़ा होता है। 

  • कार्यक्षमता: यह सौर ऊर्जा से बिजली बनाता है और दिन में घर की ज़रूरतें पूरी करता है। यदि बिजली बचती है, तो उसे ‘नेट-मीटरिंग’ के ज़रिए ग्रिड में वापस भेज दिया जाता है, जिससे बिजली बिल कम होता है।
  • विशेषता: इसमें बैटरी की ज़रूरत नहीं होती, इसलिए यह सबसे सस्ता विकल्प है। 

2. ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम (Off-Grid Solar System)

यह सिस्टम ग्रिड से नहीं जुड़ा होता और पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम करता है। 

  • कार्यक्षमता: इसमें सोलर पैनल के साथ बैटरी बैंक का उपयोग किया जाता है। दिन में बनने वाली अतिरिक्त बिजली बैटरी में स्टोर हो जाती है, जिसका उपयोग रात में या धूप न होने पर किया जा सकता है।
  • विशेषता: यह उन ग्रामीण या दूरदराज के क्षेत्रों के लिए सबसे अच्छा है जहाँ बिजली की आपूर्ति नहीं है। 

3. हाइब्रिड सोलर सिस्टम (Hybrid Solar System)

यह ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड दोनों का मिश्रण है। 

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  • कार्यक्षमता: यह ग्रिड से भी जुड़ा रहता है और इसमें बैटरी बैकअप की सुविधा भी होती है।
  • विशेषता: बिजली कटने पर भी यह बैटरी के ज़रिए बैकअप प्रदान करता है और बिजली अधिक होने पर उसे ग्रिड को भी बेच सकता है। 

सोलर पैनल की तकनीक के आधार पर प्रकार

सिस्टम के अलावा, इस्तेमाल होने वाले पैनल भी अलग-अलग तरह के होते हैं: 

थिन-फिल्म (Thin-film): ये हल्के और लचीले होते हैं, हालांकि घरों में इनका उपयोग कम होता है।

मोनोक्रिस्टलाइन (Monocrystalline): ये सबसे अधिक कुशल (17-22%) होते हैं और कम जगह में अधिक बिजली बनाते हैं। सीमित छत वाले घरों के लिए ये बेस्ट माने जाते हैं。

पॉलीक्रिस्टलाइन (Polycrystalline): ये थोड़े कम कुशल होते हैं लेकिन किफायती (सस्ते) होते हैं।

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बायफेशियल (Bifacial): ये पैनल दोनों तरफ से बिजली पैदा कर सकते हैं, जिससे उत्पादन बढ़ जाता है।

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