2KW Solar System: भारत में 2 किलोवाट (kW) सोलर सिस्टम लगाने का खर्च सब्सिडी के बाद लगभग ₹85,000 से ₹1,15,000 के बीच आता है। यह सिस्टम रोजाना 8-10 यूनिट बिजली बनाता है, जिससे बिजली बिल में 70-80% तक की भारी कमी आती है और 4-5 वर्षों में ही पूरी लागत वसूल हो जाती है, साथ ही 25 वर्षों तक मुफ्त बिजली मिलती है।
2 किलोवाट (2kW) सोलर सिस्टम लगवाने के लिए आपको पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट पर आवेदन करना होगा। इसके लिए 160-200 वर्ग फुट छत की जगह और लगभग ₹80,000-₹90,000 (सब्सिडी के बाद) की लागत आती है। यह 25 साल तक बिजली बना सकता है और इस पर 60% तक की केंद्रीय सब्सिडी मिल सकती है।
2kW सोलर सिस्टम लगवाने की प्रक्रिया:
- 1. वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन: pmsuryaghar.gov.in पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करें।
- 2. सोलर वेंडर का चयन: अपने क्षेत्र के पंजीकृत सोलर वेंडर से संपर्क करें।
- 3. टाइप का चयन (On-Grid vs Off-Grid):
- ऑन-ग्रिड (Grid-tied): यदि बिजली कटौती कम है, तो यह सबसे अच्छा है। इसमें बैटरी नहीं लगती, जो सस्ता पड़ता है और इसमें सब्सिडी भी मिलती है।
- ऑफ-ग्रिड (Off-Grid): यदि बिजली कटौती ज्यादा है, तो बैटरी वाला सिस्टम (Off-Grid) लगवाएं।
- 4. स्थापना (Installation): वेंडर आपकी छत पर सोलर पैनल और इन्वर्टर स्थापित करेगा। 2kW के लिए 160-200 वर्ग फुट की जगह चाहिए।
- 5. नेट मीटरिंग और सब्सिडी: बिजली विभाग से ‘नेट मीटर’ लगवाएं। इसके बाद सब्सिडी आपके बैंक खाते में आ जाएगी।
लागत और सब्सिडी:
2kW सिस्टम की कुल लागत बिना सब्सिडी के लगभग ₹1.5 लाख से ₹1.8 लाख हो सकती है। लेकिन, सब्सिडी मिलने के बाद, यह आपको ₹80,000 से ₹90,000 तक पड़ सकता है। इसमें DCR (Domestic Content Requirement) वाले पैनल लगवाना अनिवार्य है।
2kW सिस्टम से क्या चल सकता है?
यह एक छोटे परिवार के लिए पर्याप्त है, जिससे पंखे, लाइट, टीवी, फ्रिज और पानी की मोटर जैसी चीजें आराम से चलाई जा सकती हैं।
2 किलोवाट सोलर सिस्टम का विस्तृत विवरण (2026)
- कुल खर्च (बिना सब्सिडी): लगभग ₹1.2 लाख से ₹1.8 लाख के बीच (इन्वर्टर, पैनल, स्ट्रक्चर और इंस्टॉलेशन सहित)।
- सब्सिडी (Subsidy): सरकार द्वारा पीएम सूर्य घर योजना के तहत 2 kW के लिए भारी छूट मिलती है। सब्सिडी के बाद खर्च ₹85,000-₹1,15,000 के आसपास रह जाता है।
- बिजली उत्पादन: यह सिस्टम औसतन 8-10 यूनिट प्रतिदिन बिजली पैदा कर सकता है।
- बिजली की बचत: प्रति माह ₹2,500 से ₹3,500 का बिजली बिल आने वाले घरों के लिए यह आदर्श है।
- जगह की आवश्यकता: 16-20 वर्ग मीटर (150-200 वर्ग फुट) छाया रहित छत।
- क्या चलेगा?: 2 kW के सिस्टम पर लगभग 4-5 पंखे, 10-12 एलईडी लाइट्स, एक टीवी, लैपटॉप, फ्रिज और एक 1.5 टन का एयर कंडीशनर (AC) दिन के समय आसानी से चल सकता है, बशर्ते सही टाइप का सिस्टम (ऑन-ग्रिड या हाइब्रिड) हो।
सोलर लगाने के मुख्य फायदे:
- बिजली बिल में भारी कमी: हर महीने की भारी बचत।
- सरकार से सब्सिडी: KLK Ventures Private Limited के अनुसार, 60% तक की केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) का लाभ उठाया जा सकता है।
- 25 वर्षों तक नि:शुल्क ऊर्जा: SolarSquare के अनुसार, पैनल की लाइफ 25+ वर्ष होती है।
- निवेश पर लाभ (ROI): 3-5 वर्षों के भीतर प्रारंभिक लागत वसूल हो जाती है।
- पर्यावरण के अनुकूल: कार्बन उत्सर्जन में कमी।
ऑफ-ग्रिड सिस्टम की मुख्य विशेषताएं:
- स्वतंत्रता: सरकारी बिजली ग्रिड पर कोई निर्भरता नहीं, ग्रामीण या दूरस्थ क्षेत्रों के लिए सर्वश्रेष्ठ।
- बैटरी स्टोरेज: दिन में उत्पादित सौर ऊर्जा को रात या बादल वाले मौसम के लिए बैटरी बैंक में स्टोर किया जाता है।
- घटक: इसमें सोलर पैनल, चार्ज कंट्रोलर, बैटरी बैंक और इन्वर्टर शामिल होते हैं।
- लागत: बैटरियों के उपयोग के कारण ऑन-ग्रिड सिस्टम की तुलना में यह अधिक महंगी होती है।
- उपयोग: यह उन क्षेत्रों के लिए आदर्श है जहाँ बिजली कटौती बहुत अधिक है या ग्रिड कनेक्टिविटी नहीं है।
ऑन-ग्रिड बनाम ऑफ-ग्रिड:
| विशेषता | ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम | ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम |
|---|---|---|
| ग्रिड कनेक्शन | नहीं | हाँ |
| बैटरी | अनिवार्य | आमतौर पर नहीं |
| कीमत | उच्च | कम |
| ब्लैकआउट में काम | हाँ | नहीं |
प्रमुख उपयोग:
- ग्रामीण क्षेत्र: जहां ग्रिड नहीं पहुंचा है, वहां बिजली पहुंचाने के लिए।
- सोलर पंप: कृषि के लिए।
- स्ट्रीट लाइट: ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में।
यह तकनीक आत्मनिर्भर ऊर्जा उत्पादन के लिए एक प्रभावी, लेकिन खर्चीला उपाय है।







